राजेंद्र लाल राय चौधरी

राजेंद्र लाल राय चौधरी एक प्रमुख बंगाली कायस्थ नेता और वकील थे, जिन्होंने 1946 के नोआखली दंगों के दौरान एक सशस्त्र भीड़ का पूरे एक दिन तक डटकर सामना किया था।

पृष्ठभूमि और सामुदायिक नेतृत्व
  • सामाजिक स्थिति: वे साहपुर क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित बंगाली कायस्थ और स्थानीय ज़मींदार थे।
  • पेशेवर भूमिका: वे नोआखली बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और नोआखली जिला हिंदू महासभा के अध्यक्ष थे।
  • प्रतिष्ठा: गरीबों को कानूनी सहायता देने के कारण उन्हें "नोआखली का चित्तरंजन दास" भी कहा जाता था।
साहपुर की रक्षा और संघर्ष
  • संघर्ष का समय: 11 अक्टूबर 1946 को लक्ष्मी पूजा के दिन, गुलाम सरवर के नेतृत्व वाली एक निजी सेना 'मियार फौज' ने उनके निवास पर हमला किया।
  • वीरतापूर्ण रक्षा: राय चौधरी ने अपनी छत से राइफल चलाकर पूरे दिन भीड़ को रोके रखा।
  • सुरक्षा सुनिश्चित करना: रात के समय जब भीड़ पीछे हटी, तो उन्होंने उस समय का उपयोग अपने परिवार के सदस्यों और एक अतिथि स्वामी त्र्यंबकानंद को सुरक्षित स्थान पर भेजने के लिए किया।
  • अंतिम बलिदान: वे खुद मोर्चा संभालने के लिए पीछे रुक गए। अगले दिन गोला-बारूद खत्म होने तक वे लड़ते रहे, जिसके बाद उनकी हत्या कर दी गई।
सुचेता कृपलानी जैसी हस्तियों ने उनके इस बलिदान की तुलना शिवाजी महाराज और गुरु गोविंद सिंह की वीरता से की थी।

Comments