Kalrav
टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी ,
अंतर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी।
हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूँगा ,
काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ|
गीत नया जाता हूँ, गीत नया जाता हूँ.....
-- श्री अटल बिहारी वाजपेयी (25 December 1924 - 16 August 2018).
अंतर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी।
हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूँगा ,
काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ|
गीत नया जाता हूँ, गीत नया जाता हूँ.....
-- श्री अटल बिहारी वाजपेयी (25 December 1924 - 16 August 2018).
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